
- ठगी का तरीका: दिसंबर 2024 में, शामली निवासी डॉ. विक्की और बागपत के अनिल ने संपर्क किया और शेयर बाजार में भारी लाभ का लालच देकर प्रस्ताव रखा। शुरुआत में इंस्पेक्टर ने इन प्रस्तावों को ठुकरा दिया, लेकिन फिर आरोपियों ने उनकी पत्नी को निशाना बनाया।
- कंपनी का झांसा: महिला को मेरठ स्थित ‘विनर विजन ग्लोबल’ कंपनी के कार्यालय में ले जाया गया, जहाँ शक्ति सिंह उपाध्याय ने खुद को कंपनी का MD बताया और दावा किया कि निवेश की राशि 22 महीनों में दोगुनी हो जाएगी।
- भरोसा बनाने का जाल: पहले ₹46,500 लेकर एक फर्जी ID बनाई गई और एक फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिए ट्रेडिंग का प्रदर्शन किया गया, जिससे विश्वास पैदा हुआ। धीरे-धीरे लाखों रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर, चेक और कैश के माध्यम से वसूल लिए गए। कुल मिलाकर पीड़िता ने ₹66.36 लाख का निवेश किया।
- सच्चाई का पता चलना: पीड़िता ने कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की वेबसाइट पर जाकर पाया कि इन कंपनियों का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था।
- ठगों का नेटवर्क: पुलिस ने बताया कि यह एक संगठित सिंडिकेट था, जिसमें मैनेजर, सचिव, कैशियर और नेटवर्कर जैसे पदों पर कई लोग थे। आरोपियों में शक्ति सिंह, राजकुमार, सविता, अनिल, मनजीत गौड़, अनिल मोटा, डॉ. विक्की, ओम सिंह, राखी और आयशा शामिल हैं। सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तलाश शुरू कर दी गई है।
- ठगी की प्रक्रिया: आरोपियों ने पहले छोटे निवेश से शुरुआत की, बाद में नकली मुनाफा दिखाकर धीरे-धीरे बड़ी रकम वसूल की। जब पीड़िता ने पैसा निकालने का प्रयास किया, तो ऑफिस बंद मिला और सभी फरार हो गए।
- पुलिस की प्रतिक्रिया: एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि पीड़िता की मेहनत की कमाई गया है। पुलिस ने गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। साथ ही जांच टीम डिजिटल सबूतों, बैंकिंग लेन-देन और मोबाइल डेटा की जांच कर रही है।
- पुलिस ने आम जनता को आगाह करते हुए कहा कि लालच देने वाले निवेश ऑफर पर तत्काल भरोसा न करें और निवेश से पहले कंपनी की पूरी जानकारी और दस्तावेजों की सत्यता अवश्य जांचें।
ये घटना दर्शाती है कि कैसे भरोसा जीतकर और फर्जी सॉफ्टवेयर या “निवेश ऐप” दिखाकर शीर्षक लाभ का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी की जा सकती है। पीड़िता ने ₹66.36 लाख का निवेश किया, सभी आरोपी संगठित रूप से एक सिंडिकेट के रूप में काम कर रहे थे और अब पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।