बिलासपुर : पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पदस्थ स्टेनो बृजबिहारी साहू और लिपिक राजकुमारी किण्डो के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और शासन आदेशों को दबाने के आरोप सामने आए हैं। इस संबंध में माननीय मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को शिकायत आवेदन भेजा गया है। शिकायत के अनुसार वर्ष 2013 में राजकुमारी किण्डो पर कर्मचारियों के मेडिकल बिलों में हेराफेरी कर 4–5 करोड़ रुपये घोटाले का आरोप सिद्ध पाया गया था।

तत्कालीन जांच समिति (जिसमें डीएसपी अजीत पाटले और मुख्य लिपिक रामपाल खरसान शामिल थे) की रिपोर्ट के आधार पर उन्हें एसआई (अ) से पदावनत कर एएसआई (अ) किया गया था।लेकिन आरोप है कि यह आदेश स्टेनो बृजबिहारी साहू द्वारा दबा दिया गया और इसे सेवा रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया।दूसरा घोटाला: यात्रा भत्तों में 3–4 करोड़ की कूटरचना का आरोपशिकायतकर्ता के अनुसार वर्ष 2013 से 2018 के बीच लगभग 60–70 कर्मचारियों के टी.ए./डी.ए. (यात्रा भत्ता) में हेराफेरी और दस्तावेज़ों की जालसाजी कर फिर से करोड़ों का नुकसान पहुंचाया गया। इस मामले में थाना सिविल लाइन में अपराध क्रमांक 74/2018, धारा 409, 420, 467, 471 भादवि के तहत FIR दर्ज की गई थी।

राजकुमारी किण्डो वर्तमान में जमानत पर है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।निलंबन बहाली विवादआरोपों के अनुसार, पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर ने गंभीर आरोप लंबित होने के कारण 31 जनवरी 2019 को राजकुमारी किण्डो की बहाली का प्रस्ताव निरस्त किया था।लेकिन कथित रूप से स्टेनो बृजबिहारी साहू की मिलीभगत से आदेश को फिर से दबाया गया और 4 फरवरी 2019 को बिना सक्षम अनुमोदन के उन्हें पुन पदस्थ किया गया।उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कीराजकुमारी किण्डो ने हाल ही में दर्ज FIR रद्द करने हेतु उच्च न्यायालय में सीआरएमपी 3125/2025 प्रस्तुत किया था, जिसे पीठ ने अभिलेखों एवं दलीलों का परीक्षण करने के बाद निरस्त कर दिया।

जांच एवं कार्रवाई की मांगशिकायतकर्ता ने उच्च न्यायालय से निवेदन किया है दोनों अधिकारियों की भूमिका की न्यायिक जांच कराई जाएशासन को हुए करोड़ों के नुकसान की रिकवरी और विभागीय कार्रवाई की जाएआदेशों को दबाने और प्रशासनिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने वालों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।