नवरात्रि का उत्साह… रामानुजगंज के मां महामाया मंदिर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा

रामानुजगंज में कन्हर नदी के तट पर स्थित मां महामाया मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर की मान्यता न केवल क्षेत्रीय श्रद्धालुओं के बीच, बल्कि दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं में भी गहरी है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन से ही यहां भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। विशेषकर इस समय नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा अर्चना करने के लिए यहां पहुंच रहे हैं। नगर पालिका अध्यक्ष रमन अग्रवाल के द्वारा मंदिर में गुंबज निर्माण सहित अन्य कार्य कराए गए हैं।

मां महामाया मंदिर का इतिहास 1935 से जुड़ा हुआ है, जब सरगुजा स्टेट के तात्कालिक महाराज रामानुज शरण सिंह देव ने इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा बड़े धूमधाम से कराई थी। यह मंदिर क्षेत्र का एकमात्र देवी मंदिर था और समय के साथ यहां श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई। आज भी यहां हर दिन श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पूजा अर्चना करते हैं, और यहां यह मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से अपनी इच्छा मां महामाया से मांगता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। इस बात के कई उदाहरण भी सामने आए हैं, जिनमें श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी हुई हैं।

मंदिर में पूजा अर्चना की परंपरा केदारनाथ पांडे और उनकी तीन पीढ़ियों द्वारा निभाई जाती रही है। केदारनाथ पांडे ने लगभग चार दशकों तक मंदिर में पूजा अर्चना की थी। उनके बाद उनके पुत्र नंदलाल पांडे और अब उनके पोते जितेंद्र पांडे पूजा अर्चना की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यह परंपरा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि एक ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्व रखती है।

मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं के मंदिरमां महामाया मंदिर में महामाया मां की सिद्ध पीठ अलौकिक मूर्ति स्थापित है। इसके अलावा, यहां अन्य देवी-देवताओं के भी मंदिर हैं, जिनमें शीतला माता, काली माता, संतोषी माता, दक्षिणमुखी हनुमान जी, माता सती और शंकर जी के मंदिर प्रमुख हैं। इन मंदिरों में भी श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और आस्था व्यक्त करने के लिए नियमित रूप से पूजा अर्चना करते हैं।

नवरात्रि के दौरान यहां पूजा और अर्चना का विशेष महत्व है। श्रद्धालु पूरे दिल से मां महामाया से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। मंदिर में हर वर्ष विशेष पूजा आयोजनों का आयोजन किया जाता है, जिसमें सैकड़ों भक्त हिस्सा लेते हैं और इस दौरान भक्तों का आस्था और विश्वास और भी प्रगाढ़ हो जाता है

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