सरकारी आदेश की अव्हेलना करने वाले सचिव पर मेहरबानी, नो वर्क-नो पे अवधि में भी लाखों रुपए का भुगतान, इधर 10 से अधिक सचिवों को अब नहीं मिला वेतन

गरियाबंद. गरियाबंद जिला पंचायत में अफसरों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. हाल ही में सामने आया मामला दिखाता है कि जहां नियमों का पालन करने वाले पंचायत सचिव महीनों से अपनी बुनियादी गुजारा राशि के लिए भटक रहे हैं, वहीं आदेश की अवहेलना करने वाले एक सचिव को जिला पंचायत ने न सिर्फ मनपसंद पदस्थापना दे दी, बल्कि अनुपस्थित कार्य दिवस का लाखों रुपए का भुगतान भी कर दिया. इस पक्षपात को लेकर जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

दरअसल, पंचायत सचिव समारु राम ध्रुव को शोभा पंचायत में रहते हुए निर्माण कार्य में गड़बड़ी के आरोप में निलंबित किया गया था. 2021 में बहाली के बाद उनकी तैनाती तेतलखूंटी पंचायत में की गई, लेकिन उन्होंने आदेश को नजरअंदाज कर ज्वाइन ही नहीं किया. यह अनुपस्थिति करीब अगस्त 2025 तक यानी 44 महीने तक जारी रहा. इस दौरान जनपद पंचायत से लगातार नोटिस भेजे गए और जानकारी जिला पंचायत को भी दी गई, मगर सचिव ने कोई जवाब नहीं दिया. इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर “नो वर्क-नो पे” अवधि में भी उन्हें लाखों रुपए का भुगतान कर दिया गया और अब जाड़ापदर पंचायत में पदस्थ कर दिया गया.

संजय नेताम ने कहा कि पंचायत सचिव को किसी भी प्रकार के अर्जित अवकाश का प्रावधान नहीं है, बावजूद इसके नियमों को ताक में रखकर नो वर्क नो पे की अवधि में भी लाखों रुपए का भुगतान किया गया.उसे मनपसंद पंचायत में पदस्थापना भी दी गई. संजय ने कहा जनपद पंचायत में जब सचिव का सारा रिकॉर्ड था, जनपद के अधीन कर्माचारी को उपकृत करने से पहले जनपद का अभिमत या उसे सूचना देना भी जरूरी नहीं समझा गया. संजय ने इस गड़बड़ी की उच्च स्तरीय जांच कर संलिप्त अधिकारी और कर्मचारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग किया है.

संजय ने बताया कि मैनपुर जनपद क्षेत्र में 10 से ज्यादा ऐसे निलंबित पंचायत सचिव है, जिन्हे निलंबन की अवधि में दिए जाने वाले गुजारा भत्ता जो कि पगार का आधा होता है, उक्त राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया है. क्योंकि ये सचिव सेटिंग नहीं कर पाए. संजय ने पूर्व जिला पंचायत सीईओ के कार्यकाल में नियम विरुद्ध पंचायत उप संचालक बन कर बैठे कर्मी द्वारा नियम कायदे को ताक में रखकर सचिव को लाखों का नियम विरुद्ध भुगतान करने का आरोप लगाया गया है.

मामले में चर्चा के लिए जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर को कॉल किया गया, उन्होंने रिसीव नहीं किया, उन्होंने मेसेज का भी कोई जवाब नहीं दिया. वही इस मामले की शिकायत पत्र लेने के बाद कलेक्टर भगवान सिंह उईके ने विधिवत जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही है.

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